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क्या पर्सनल लोन नहीं भरने जाना पड़ सकता है जेल, लोन लेने वालों के लिए जरूरी नियम Personal Loan Rule

Personal Loan Rule आधुनिक जीवनशैली में पर्सनल लोन हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। अचानक आने वाली वित्तीय जरूरतों से लेकर बड़े सपनों को पूरा करने तक, पर्सनल लोन ने लोगों के लिए कई द्वार खोले हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्सनल लोन न चुकाने के क्या परिणाम हो सकते हैं? आइए इस विषय पर विस्तार से चर्चा करें।

पर्सनल लोन का बढ़ता चलन

वर्तमान समय में लोगों के जीवन स्तर में सुधार के साथ-साथ उनकी आवश्यकताएँ और आकांक्षाएँ भी बढ़ी हैं। शादी, उच्च शिक्षा, विदेश यात्रा, घर का नवीनीकरण, मेडिकल इमरजेंसी – ऐसी कई जरूरतें हैं जिन्हें पूरा करने के लिए अक्सर तत्काल धन की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि पर्सनल लोन की मांग लगातार बढ़ रही है।

भारतीय वित्तीय बाजार में कई बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) विभिन्न प्रकार के पर्सनल लोन प्रदान करती हैं। ये लोन आमतौर पर 50,000 रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक की राशि के लिए उपलब्ध होते हैं, जिनकी अवधि 1 से 5 वर्ष तक होती है।

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पर्सनल लोन के प्रकार

पर्सनल लोन मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:

1. सुरक्षित लोन (Secured Loan)

सुरक्षित लोन वे होते हैं जिनमें उधारकर्ता को लोन प्राप्त करने के लिए कोई संपत्ति या मूल्यवान वस्तु गिरवी रखनी पड़ती है। ये संपत्तियां आमतौर पर सोना, प्रॉपर्टी, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर या बॉन्ड हो सकती हैं। सुरक्षित लोन में:

  • ब्याज दर अपेक्षाकृत कम होती है
  • लोन राशि अधिक हो सकती है
  • लोन की अवधि लंबी हो सकती है
  • क्रेडिट स्कोर की अपेक्षाएं कम होती हैं

2. असुरक्षित लोन (Unsecured Loan)

असुरक्षित लोन में उधारकर्ता को किसी भी प्रकार की संपत्ति गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती है। इस प्रकार के लोन में:

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  • ब्याज दर अपेक्षाकृत अधिक होती है
  • लोन राशि सीमित होती है
  • लोन की अवधि छोटी होती है
  • उच्च क्रेडिट स्कोर की आवश्यकता होती है

पर्सनल लोन लेने से पहले विचारणीय बातें

किसी भी प्रकार का लोन लेने से पहले निम्न बातों पर विचार करना चाहिए:

  1. आवश्यकता और उद्देश्य का मूल्यांकन: क्या लोन लेना वास्तव में जरूरी है? क्या इसका उपयोग उत्पादक कार्य के लिए किया जाएगा?
  2. चुकाने की क्षमता का आकलन: क्या आपकी मासिक आय लोन EMI चुकाने के लिए पर्याप्त है? वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, EMI आपकी मासिक आय का 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  3. ब्याज दरों की तुलना: विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली ब्याज दरों की तुलना करें।
  4. शर्तों और नियमों को समझें: लोन समझौते में छिपी हुई शर्तों और अतिरिक्त शुल्कों के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
  5. अपने क्रेडिट स्कोर की जांच करें: अच्छा क्रेडिट स्कोर बेहतर ब्याज दरों और लोन शर्तों के लिए महत्वपूर्ण है।

लोन न चुकाने के परिणाम

पर्सनल लोन की सुविधा का लाभ उठाना आसान है, लेकिन इसे समय पर चुकाना उतना ही महत्वपूर्ण है। लोन न चुकाने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जो लोन के प्रकार पर निर्भर करते हैं।

सुरक्षित लोन न चुकाने के परिणाम

  1. प्रारंभिक चेतावनी: बैंक या वित्तीय संस्थान लोन चुकाने के लिए फोन कॉल, SMS या ईमेल के माध्यम से रिमाइंडर भेजेंगे।
  2. कानूनी नोटिस: यदि भुगतान में देरी जारी रहती है, तो आपको औपचारिक कानूनी नोटिस भेजा जा सकता है।
  3. सरफेसी एक्ट (SARFAESI Act): बैंक इस अधिनियम के तहत आपकी गिरवी रखी गई संपत्ति पर कब्जा कर सकता है।
  4. न्यायिक कार्यवाही: बैंक आपके खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर कर सकता है।
  5. संपत्ति की नीलामी: आपकी गिरवी रखी गई संपत्ति को बकाया राशि वसूलने के लिए नीलाम किया जा सकता है।

असुरक्षित लोन न चुकाने के परिणाम

  1. निरंतर अनुस्मारक: बैंक या वित्तीय संस्थान भुगतान के लिए लगातार अनुस्मारक भेजेंगे।
  2. लेट फीस और जुर्माना: देरी से भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क और जुर्माना लगाया जाएगा।
  3. वसूली एजेंसियों का हस्तक्षेप: बैंक आपका केस वसूली एजेंसियों को सौंप सकता है, जो आपसे संपर्क करके भुगतान की मांग करेंगी।
  4. क्रेडिट स्कोर का ह्रास: लोन न चुकाने से आपका क्रेडिट स्कोर बुरी तरह प्रभावित होगा, जिससे भविष्य में नए लोन या क्रेडिट कार्ड प्राप्त करना मुश्किल हो जाएगा।
  5. कानूनी कार्यवाही: बैंक आपके खिलाफ अदालत में वसूली वाद दायर कर सकता है।

क्या पर्सनल लोन न चुकाने पर जेल हो सकती है?

यह एक सामान्य भ्रम है कि लोन न चुकाने पर जेल हो सकती है। भारतीय कानून के अनुसार, केवल लोन न चुकाने के कारण आपको जेल नहीं हो सकती। यह एक दीवानी मामला (सिविल केस) है, न कि आपराधिक मामला (क्रिमिनल केस)।

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हालांकि, यदि आपने लोन के भुगतान के लिए चेक दिया था जो बाउंस हो गया, तो नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत आप पर आपराधिक मुकदमा चल सकता है। इस अपराध के लिए दो साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

इसके अलावा, यदि आपने जानबूझकर धोखाधड़ी की है या गलत दस्तावेज जमा किए हैं, तो भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 के तहत आपराधिक मुकदमा चल सकता है।

लोन न चुका पाने की स्थिति में क्या करें?

यदि आप किसी कारण से लोन नहीं चुका पा रहे हैं, तो निम्न कदम उठा सकते हैं:

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  1. बैंक से संपर्क करें: अपनी स्थिति के बारे में बैंक को तुरंत सूचित करें और समाधान की तलाश करें।
  2. लोन रीस्ट्रक्चरिंग का अनुरोध करें: कई बैंक लोन पुनर्गठन की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे EMI की राशि कम हो सकती है या भुगतान अवधि बढ़ाई जा सकती है।
  3. डेट कंसोलिडेशन लोन लें: यदि आपके पास कई लोन हैं, तो डेट कंसोलिडेशन लोन लेकर सभी लोन एक साथ चुकाने और एक ही EMI का भुगतान करने पर विचार करें।
  4. संपत्ति का विक्रय: यदि कोई अन्य विकल्प नहीं है, तो अपनी संपत्ति का एक हिस्सा बेचकर लोन चुकाने पर विचार करें।
  5. वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें: एक अनुभवी वित्तीय सलाहकार आपकी वित्तीय स्थिति का विश्लेषण करके उचित सलाह दे सकता है।

वित्तीय संकट से बचने के उपाय

लोन लेने और उसे चुकाने में परेशानी से बचने के लिए निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं:

  1. बजट बनाएं और उसका पालन करें: अपनी आय और खर्च का विश्लेषण करें और एक व्यवहारिक बजट बनाएं।
  2. आपातकालीन निधि बनाएं: अचानक आने वाली वित्तीय जरूरतों के लिए 3-6 महीने के खर्च के बराबर आपातकालीन निधि बनाए रखें।
  3. अनावश्यक खर्च से बचें: लग्जरी आइटम्स और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें।
  4. क्रेडिट कार्ड का बुद्धिमानी से उपयोग करें: क्रेडिट कार्ड पर पूरी बकाया राशि हर महीने चुकाएं, न कि केवल न्यूनतम राशि।
  5. बीमा करवाएं: स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा जैसे आवश्यक बीमा करवाएं ताकि अप्रत्याशित परिस्थितियों में वित्तीय बोझ न पड़े।

पर्सनल लोन एक उपयोगी वित्तीय साधन है जो आपकी जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह एक दोधारी तलवार की तरह है जिसका उपयोग सावधानी से करना चाहिए। लोन लेने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति का आकलन करें, लोन की शर्तों को अच्छी तरह समझें और समय पर भुगतान सुनिश्चित करें।

याद रखें, वित्तीय अनुशासन और जिम्मेदारी बरतने से न केवल आप लोन के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं, बल्कि वित्तीय स्वतंत्रता की ओर भी अग्रसर हो सकते हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले हमेशा विशेषज्ञों से परामर्श लें और अपनी वित्तीय योजना बनाते समय दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं।

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